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Saturday, 18 March 2017

KFC Motivational Success Story in Hindi

KFC स्‍टोरी – कर्नल सैंडर्स की दिल पिघला देने वाली कहानी


Colonel Harland Sanders, KFC (Kentucky Fried Chicken) के founder का नाम बहुत कम ही लोग जानते होंगे। कर्नल सैंडर्स का अपना छोटा सा Business था जिससे इनकी रोजी-रोटी चलती थी, लेकिन वहां पर highway बनने के कारण इनका business बन्द हो गया। कुछ ही दिनों में इनकी पूँजी भी खत्म हो गयी और खाने के भी लाले पड़ गये। अब उनकी उम्र भी लगभग 65 वर्ष हो चुकी थी और हाल यह था की खोने के लिए अब उनके पास में कुछ भी नहीं बचा था।

Colonel Harland Sanders को chicken बनाना बहुत पसंद था और उनको अपने चिकन प्रयोग पर बहुत भरोसा था, वो मसाले और प्रेसर कुकर लेकर अपनी चिकन बनाने का प्रयोग की मार्केटिंग करने निकल पड़े। उन्होंने अलग-अलग रेस्टोरेंट से मिलना शुरू किया। समय ने फिर भी उनका साथ नहीं दिया, एक-एक करके सभी रेस्टोरेंट मालिक उन्हें रिजेक्ट करते गये।

लेकिन कर्नल सैंडर्स ने भी हार नहीं मानी, वह लगातार अपने कार्य में लगे रहे, सीखते रहे और कोशिश रहे। आपको यह सुनकर हैरानी होगी कि वह 1009 बार Interview में असफल रहे और एक हजार नौ (1009) लोगो ने उनको रिजेक्ट कर दिया, तब जाकर उनको सफलता मिल ही गई। हाँ अपने सही पढ़ा है, एक हजार नौ बार रिजेक्ट होने के बाद, एक हजार नौ बार ना सुनने के बाद उनको उनकी पहली हाँ मिली।


सोचो 65 की उम्र में, एक एसी उम्र जब लोग रिटायर हो जाते हैं, एक इस उम्र में जब लोग दुबारा उठने से हार मान लेते हैं। उस उम्र में उन्होंने अपने चिकन प्रयोग के साथ एक ऐसा बिज़नस खड़ा कर दिया जो आज 120 देशों में है, 18000 से ज्यादा KFC के रेस्टोरेंट्स (Restaurants) हैं, और 20 अरब डॉलर से ज्यादा उनका एक साल की कमाई है।
दोस्तों इस दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है, लेकिन लोग फिर भी अपने इरादे तोड़ देते हैं। कोई भी कार्य अगर सच्चे दिल से, ईमानदारी, मेहनत और लगन से किया जाय तो उसमे एक न एक दिन सफलता अवश्य मिलती है। संत कबीरदास जी ने सही ही लिखा है:-
“करत-करत अभ्यास से, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात ते, सिल पर परत निशान।।”
जैसा कि कर्नल सैंडर्स की कहानी आपने पढ़ी, हम इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि अगर कोई भी व्यक्ति लगातार प्रयास करता रहे तो एक दिन सफल अवश्य होगा।
“Practice makes a man perfect.”

दोस्तों यह story बहुत ही Motivational और हमारी young generation के लिए बहुत ही Inspirational story है। आज chicken खाने वाले लोग बड़े चाव से KFC (Kentucky Fried Chicken) में जाकर चिकेन खाते है वो Colonel Harland Sanders की ही देन है। यहाँ बात केवल chicken की ही नहीं है अपितु कोई भी कार्य जो मेहनत और लगन से किया जाये, एक दिन सफलता जरूर मिलती है, अगर कोई हार मानकर न बैठ जाये तो।

Thursday, 16 March 2017

विराट कोहली की जीवनी | Virat Kohli Biography In Hindi

पूरा नाम    – विराट प्रेम कोहली
जन्म        – 5 नवम्बर 1988
जन्मस्थान – दिल्ली
पिता        – प्रेम कोहली
माता        – सरोज कोहली

विराट कोहली की जीवनी – Virat Kohli Biography In Hindi

विराट कोहली का जन्म 5 नवम्बर 1988 को दिल्ली में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उसके पिता प्रेम कोहली एक अपराधिक वकील और माता सरोज कोहली एक गृहिणी है। उन्हें एक बड़ा भाई विकाश और एक बड़ी बहन भावना भी है। उनके परिवार के अनुसार जब कोहली 3 साल के थे तभी उन्होंने क्रिकेट बैट हात में ली थी, और अपने पिता को बोलिंग करने कहा था।
कोहली उत्तम नगर में बड़े हुए और विशाल भारती पब्लिक स्कूल से शिक्षा ग्रहण की। 1998 में, पश्चिमी दिल्ली क्रिकेट अकादमी बनी और कोहली 9 साल की आयतु में ही उसमे शामिल हुए। कोहली के पिता ने तभी कोहली को अकादमी में शामिल किया जब उनके पडोसी ने उनसे कहा की, “विराट को गल्ली क्रिकेट में समय व्यर्थ नही करना चाहिये बल्कि उसे किसी अकादमी में व्यावसायिक रूप से क्रिकेट सीखना चाहिये।” राजीवकुमार शर्मा के हातो कोहली ने प्रशिक्षण लिया और सुमित डोगरा अकादमी में मैच भी खेला। 9 वी कक्षा में उन्हें सविएर कान्वेंट में डाला गया ताकि उन्हें क्रिकेट प्रशिक्षण में मदद मिल सके। खेलो के साथ ही कोहली पढाई में भी अच्छे थे, उनके शिक्षक उन्हें, “एक होनहार और बुद्धिमान बच्चा बताते है।”
18 दिसम्बर 2006 को ब्रेन स्ट्रोक की वजह से काफी दिनों तक आराम करने के बाद उनके पिता की मृत्यु हो गयी। अपने प्रारंभिक जीवन को याद करते हुए कोहली एक साक्षात्कार में बताते है की, “मैंने अपने जीवन में बहोत कुछ देखा। मैंने युवा दिनों में ही अपने पिता को खो दिया, जिससे पारिवारिक व्यापार भी डगमगा गया था, इस वजह से मुझे किराये की रूम में भी रहना पड़ा। ये समय मेरे और मेरे परिवार के लिए काफी मुश्किल था। आज भी उस समय को याद करते हुए मेरी आँखे नम हो जाती है।” कोहली के अनुसार, बचपन से ही क्रिकेट प्रशिक्षण में उनके पिता ने उनकी सहायता की थी। “मेरे पिता ही मेरे लिए सबसे बड़ा सहारा थे।” वही थे जो रोज़ मेरे साथ खेलते थे। आज भी कभी-कभी मुझे उनकी कमी महसुस होती है।

विराट कोहली क्रिकेट करियर – Virat Kohli Cricket Career :-

विराट कोहली एक अंतर्राष्ट्रीय भारतीय क्रिकेटर है। वे दाये-हात के बल्लेबाज है और कभी-कभी दाये-हात से बोलिंग भी कर लेते है। वे अभी टेस्ट क्रिकेट की भारतीय टीम के कप्तान और वन-डे क्रिकेट की भारतीय टीम के उप-कप्तान है। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में वे रॉयल चैलेंजर बंगलौर के कप्तान है।
उन्होंने घरेलु क्रिकेट में विविध-उम्र की टीम में दिल्ली का प्रतिनिधित्व भी किया है। वे अंडर-19 टीम में भारत के कप्तान थे जिसने 2008 में मलेशिया के अंडर-19 विश्वकप में इतिहास रचा था। इसके कुछ महीनो बाद ही उन्होंने श्रीलंका के विरुद्ध अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुवात की थी। शुरू-शुरू में उन्हें टीम में आरक्षित खिलाडी के रूप में रखा जाता था, लेकिन जल्द ही वन-डे क्रिकेट में मध्यक्रम में उन्होंने अपने आप को साबित किया। 2011 में विश्वकप जितने वाली भारतीय टीम में से एक विराट कोहली थे। कोहली ने 2011 में वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ किंग्स्टन में अपना पहला टेस्ट मैच खेला। 2013 से ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका में अपने शतको के कारण उन्हें “वन-डे स्पेशलिस्ट” के नाम से जाना जाता है। इसी साल वे ICC की वन-डे रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर भी पहोचे। उस समय अपने करियर में वे पहली कार वन-डे बैट्समैन की लिस्ट में पहले स्थान पर पहोचे थे। बाद में उन्हें 20-20 प्रारूप में भी सफलता मिली, वे ICC की सर्वश्रेष्ट 20-20 बैट्समैन की सुची में भी शीर्ष पर रहे।
कोहली को 2012 में भारतीय वन-डे टीम के उप-कप्तान के रूप में नियुक्त किया गया, और बहोत से समय भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अनुपस्थिति में भी वे टीम की बागडोर सँभालते है। धोनी के 2014 में टेस्ट से सन्यास लेने के बाद से ही कोहली को टेस्ट टीम की कप्तानी सौपी गयी। कोहली ने अपने नाम कई रिकार्ड्स किये जिसमे सबसे तेज़ वन-डे शतक, वन-डे क्रिकेट में सबसे तेज़ 5000 रन और सबसे तेज़ 10 वन-डे शतक बनाना भी शामिल है। वे विश्व में अकेले ऐसे बल्लेबाज़ है जिन्होंने लगातार 4 सालो तक वनडे क्रिकेट में 1000 या उस से भी ज्यादा रन बनाये है। 2015 में, वे 20-20 में 1000 रन बनाने वाले दुनिया के सबसे तेज़ बल्लेबाज़ बन गये।
कोहली को कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया। जैसे की 2012 में ICC ODI प्लेयर ऑफ़ द इयर और BCCI द्वारा 2011-12 का सर्वश्रेष्ट अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर। 2013 में, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपने अतुल्य योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार दिया गया। स्पोर्ट प्रो, एक UK मैगज़ीन, ने कोहली को 2014 में दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा मार्केटेबल व्यक्ति बताया। कोहली ISL की टीम FC गोवा और IPTL फ्रेंचाईसी UAE रॉयल्स के सह-मालक भी है।
Note :- आपके पास About Virat Kohli In Hindi मैं और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट मै लिखे हम इस अपडेट करते रहेंगे। कुछ महत्त्व पूर्ण जानकारी Biography Of Virat Kohli के बारे में Wikipedia ली गयी है।

Wednesday, 15 March 2017

भारत रत्न सचिन तेंदुलकर जीवनी और सफलता की कहानी ?

क्रिकेट के भगवान नाम से प्रसिद्ध और भारत रत्न सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को राजापुर के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ. इनके पिता का नाम रमेश तेंदुलकर था और उन्होंने सचिन का नाम अपने प्रिय संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा था.
विश्व क्रिकेट इतिहास में सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरो में गिने जाने वाले Sachin Tendulkar के नाम ऐसे कई वर्ल्ड रिकॉर्ड है जिन्होंने सचिन को वर्ल्ड क्रिकेट का बेताज बादशाह बना दिया.


Sachin Tendulkar Life And Succes Story

एक मध्यम वर्ग परिवार में पैदा हुए सचिन ने अपनी शिक्षा मुंबई के शारदाश्रम विश्वविद्यालय में की. इनके भाई अजित तेंदुलकर ने इनकी प्रतिभा को जानकर बचपन से ही इनके अन्दर क्रिकेट के गुणों का समावेश किया और इनको क्रिकेट की बारीकियो को समझाते हुए इनका मार्गदर्शन किया.
इनके पिता ने इनका दाखिला क्रिकेट के ‘द्रोणाचार्य’ कहे जाने वाले रमाकांत आचरेकर के यहाँ करा दिया जिन्होंने सचिन के क्रिकेट प्रतिभा को अच्छी तरह से निखारा.वही सचिन तेज गेदबाजी सीखने के लिए M.R.F. Foundation के ट्रेनिंग कैंप में गये जहाँ उन्हें तेज गेदबाजी के कोच डेनिस लिली ने अपनी बल्लेबाजी पर पूरा ध्यान देने के लिए कहा और तब से सचिन बल्लेबाजी करने लगे.
सचिन के कोच रमेश आचरेकर का सचिन को अभ्यास कराने का तरीका बिल्कुल अनोखा था. वह क्रीज पर विकेट के नीचे 1 रूपये का सिक्का रखते थे. अगर किसी गेदबाज ने सचिन को आउट कर दिया तो यह सिक्का उस गेदबाज का हो जाता था और अगर सचिन आउट नहीं हुए तो यह सिक्का सचिन का हो जाता था. सचिन ने अपने गुरु से ऐसे ही 13 सिक्के जीते जो अभी भी सचिन के पास है. इस तरह से सचिन के गुरु ने सचिन को बल्लेबाजी में निपुण बनाया. 
इसके बाद 15 साल की उम्र में सचिन ने विनोद काम्बली के साथ मिलकर हारेस शील्ड मुकाबले में 664 रन की पार्टनरशिप की जिसमे सचिन ने अपनी अदभुत प्रतिभा के दम पर 320 रनों की पारी खेली. ऐसे प्रदर्शन को देखकर विपक्षी टीम ने मैच आधे से खेलना ही बंद कर दिया और हार मान ली.
इस प्रदर्शन से सचिन बहुत प्रसिद्ध हो चुके थे जिस कारण 16 वर्ष की छोटी उम्र में ही उनको टीम इंडिया में जगह मिल गयी और इन्होने सन 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपने अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत कर की . सचिन ने अपने लाजबाब क्रिकेट से क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया था.
sachin ने सन 1990 में इंग्लैंड दौरे में अपने टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक लगाया जिसमे उन्होंने नाबाद 119 रन बनाये इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट मुकाबलों में भी सचिन का प्रदर्शन यही रहा और उन्होंने कई टेस्ट शतक जड़े. सचिन ने 1992-93 में अपना पहला घरेलु टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ भारत में खेला जो उनका टेस्ट कैरियर का 22वा टेस्ट मैच था.
सचिन की प्रतिभा और क्रिकेट तकनीक को देखते हुए सभी ने उन्हें डॉन ब्रेडमैन की उपाधि दी जिसे बाद में डॉन ब्रेडमैन ने भी खुद इस बात को स्वीकार करा.
सचिन के शानदार प्रदर्शन के कारण उनको टीम इंडिया की कप्तानी भी दी गई लेकिन वे एक कप्तान के रूप मे सफल नहीं हो सके और उनका अपना खेल भी इससे बहुत प्रभावित हुआ. जिस कारण उन्होंने स्वतः ही कप्तानी का पद छोड़ दिया.
Sachin Tendulkar के क्रिकेट जीवन का सबसे बुरा दौर तब आया जब सचिन सन 2005-06 में टेनिस एब्लो और कंधो में दर्द के कारण काफी अनफिट रहे जिस कारण उनका खेल भी इससे प्रभावित हुआ. किन्तु बेजोड़ प्रतिभा और कठिन परिश्रम के धनी सचिन ने अपने खेल में बदलाव करके खुद को सन 2008 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे में साबित किया और रनों का अम्बार लगा दिया.
23 दिसम्बर 2012 को सचिन ने वन-डे क्रिकेट से संन्यास लिया और वहीँ 16 नवम्बर 2013 को मुम्बई के अपने अन्तिम टेस्ट मैच में उन्होंने 74 रनों की पारी खेलकर टेस्ट क्रिकेट से सन्यास लिया. तेंदुलकर ने अपने कैरियर में 200 टेस्ट मैचों में 53.79 के बल्लेबाजी औसत के साथ 15921 रन बनाये जिसमे उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 246* रन था और वही उनके नाम 51 शतक और 68 अर्धशतक दर्ज है.
गेदबाजी में उन्होंने 46 विकेट लिए. वही वनडे मैचों में सचिन ने 463 मैचों में 44.83 के बल्लेबाजी औसत के साथ 18426 रन बनाये जिसमे उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 200* रन था वही उनके नाम 49 शतक और 96 अर्धशतक दर्ज है. उन्होंने वनडे मैचों में अपनी गेदबाजी से टीम के लिए 154 विकेट भी लिये.
इनकी बल्लेबाजी में अदभुत प्रतिभा और कठिन परिश्रम के कारण इन्हें Criket का चमत्कार भी कहा जाता है.
अपने खेल के अलावा अपने व्यक्तित्व के कारण सचिन को दुनियाभर में सभी क्रिकेट प्रेमी प्यार और सम्मान देते है. क्रिकेट के एक लीजेंड खिलाडी होने के बावजूद उन्होंने कभी खुद में अहंकार नहीं आने दिया और हमेशा अपने ego से दूर रहे वरना इतनी शौहरत कमाने के बाद इतना सरल बने रहना हर किसी के बस की बात नहीं होती.
पूरी दुनिया में आज हर उम्र के व्यक्ति की जुबान पर क्रिकेट मतलब सचिन तेंदुलकर ये ही नाम रहता है.
भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित होने वाले वह प्रथम खिलाड़ी और भारत रत्न पाने वालो में सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं. वही वो राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित अकेले क्रिकेट खिलाड़ी हैं. इनको सन 2008 में पद्म विभूषण से भी पुरस्कृत किया गया.

* सचिन तेंदुलकर को मिले पुरस्कार Sachin Tendulkar Awards :

* सन 2014 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित.
* सन 2008 में भारत के दुसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित.
* सन 1999 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित
* सन 2001 में महाराष्ट्र राज्य के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से सम्मानित
* सन 1994 में खेल में उनके उत्कृष्ट उपलब्धि के सम्मान में भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित
* सन 1997-98 में खेल में उपलब्धि के लिए दिए गए भारत के सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित
* विज़डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर 1998 और सन 2010 में विज़डन लीडिंग क्रिकेटर ऑफ द ईयर.
* 2003 क्रिकेट विश्व कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट
* सन 2004, 2007 और 2010 में आईसीसी विश्व वनडे एकादश टीम में.
* सन 2009, 2010 और 2011 में आईसीसी विश्व टेस्ट एकादश टीम में.
* 2010 में खेल और काम में पीपुल्स च्वाइस अवार्ड में उत्कृष्ट उपलब्धि एशियाई पुरस्कार, लंदन में
* वर्ष 2010 के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर के लिए आईसीसी पुरस्कार.
* 2010 में एलजी पीपुल्स च्वाइस अवार्ड मिला.
* 2010 में भारतीय वायु सेना द्वारा मानद ग्रुप कैप्टन की उपाधि.
* बीसीसीआई द्वारा 2011 वर्ष के सर्वश्रेष्ठ भारतीय क्रिकेटर.
* सन 2012 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी) की मानद आजीवन सदस्यता
* भारतीय पोस्टल सर्विस ने 2013 में तेंदुलकर का एक डाक टिकट जारी किया और यह मदर टेरेसा के बाद दूसरे भारतीय है जिनके लिये ऐसा डाक टिकट उनके अपने जीवनकाल में ही जारी किया गया हो.
लिटिल मास्टर व मास्टर ब्लास्टर के नाम से विख्यात सचिन का विवाह सन 1994 में अंजलि तेंदुलकर से हुआ. सचिन के दो बच्चे हैं.सारा और अर्जुन. इसके अलावा सचिन एक सफल रेस्टोरेंट के मालिक भी हैं जिसका नाम उनके ही नाम पर सचिन है.
सचिन को भारत में सकारात्मकता का प्रतीक और सम्मानित व्यक्ति इसलिए भी माना जाता है क्योंकि वे “अपनालय” नाम का एक गैर सरकारी संगठन भी चलाते हैं जिसमे वे हर वर्ष 200 बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी स्वयं लेते है. 
वर्तमान में सचिन राज्य सभा के सदस्य हैं उन्हें सन् 2012 में राज्य सभा की सदस्यता मिली.

* सचिन तेंदुलकर के नाम कुछ अनोखे वर्ल्ड रिकॉर्ड Sachin Tendulkar Record :

* सचिन के नाम अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक.
* एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में दोहरा शतक जड़ने वाले वह पहले खिलाड़ी है.
* वनडे अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में 18426 सबसे ज्यादा रन है.
* वनडे अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में सबसे ज्यादा 51 शतक.
* वनडे अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में सबसे ज्यादा रन.
* टेस्ट अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में सबसे ज्यादा 49 शतक.
* टेस्ट अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में 15921 सबसे ज्यादा रन है.
* सबसे अधिक वनडे अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच (463) खेलने वाले एकमात्र खिलाडी.
* सबसे अधिक टेस्ट अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच (200) खेलने वाले एकमात्र खिलाडी.
* टेस्ट अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में 13000 रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज.
* वनडे अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में 16000 रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज.
* वनडे अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में सबसे ज्यादा मैन ऑफ द सीरीज.
* वनडे अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में सबसे ज्यादा मैन ऑफ द मैच.
* अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में सबसे ज्यादा 34000 हजार से ज्यादा रन बनाने वाले पहले खिलाडी.
*सबसे अधिक अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट का कैरियर.
महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को हमारा सलाम जिन्होंने भारत के करोड़ो लोगो को कई बार खुशियों के पल दिए और भारत का नाम विश्वभर में रोशन किया.


Note : आपके पास About Sachin Tendulkar In Hindi मैं और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट मै लिखे हम इस अपडेट करते रहेंगे।
कुछ महत्त्व पूर्ण जानकारी Biography Of Sachin_Tendulkar के बारे में Wikipedia ली गयी है।

Monday, 13 March 2017

Mukesh Ambani Biography In Hindi | मुकेश अंबानी की जीवनी

पूरा नाम     –  मुकेश धीरुभाई अंबानी
जन्म          –  19 अप्रैल 1957
जन्मस्थान –  अदेन ( यमन )
पिता          –  धीरुभाई अंबानी
माता          –  कोकिलाबेन अंबानी
विवाह        –  नीता अंबानी ( Mukesh Ambani Wife )

Mukesh Ambani Biography In Hindi

मुकेश अंबानी / Mukesh Ambani का जन्म 19 अप्रैल 1957 को हुआ. उनके पिता का नाम धीरुभाई अंबानी ( Dhirubhai Ambani ) और माता का नाम कोकिलाबेन अंबानी था. उन्हें एक छोटे भाई अनिल अंबानी और दो बहने दीप्ती सलग ओंकार और नीना कोठारी भी है. पूरा अंबानी परिवार 1970 तक मुंबई के भुलेश्वर में 2 बेडरूम के अपार्टमेंट में रह रहा था. बाद में धीरुभाई ने कोलाबा में एक 14 मंजिला अपार्टमेंट ख़रीदा जिसे “Sea Wind” कहा जाता है, जहा अब तक, मुकेश और अनिल अपने-अपने परिवार के साथ अलग-अलग मंजिल पर रह रहे थे.
Mukesh Ambani Education : उन्होंने अपने भाई और उनके सहकर्मी आनंद जैन के साथ पेद्दार रोड, मुंबई में हिल ग्रेंज हाई स्कूल में उन्होंने पढाई की. और इंस्टिट्यूट ऑफ़ केमिकल टेक्नोलॉजी, माटुंगा में उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग में अपनी B.E की डिग्री प्राप्त की. बाद में मुकेश ने Stanford विश्वविद्यालय से MBA करना चाहा लेकिन वे उस से अलग हो गये और रिलायंस बनाने में अपने पिता की मदद करने लगे. जो उस समय भी एक छोटी लेकिन तेज़ी से बढ़ने वाली संस्था थी.
मुकेश धीरुभाई अंबानी भारतीय व्यापर के प्रभावशाली व्यक्ति और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के अध्यक्ष, मैनेजिंग डायरेक्टर और सबसे बड़े शेयरहोल्डर है. रिलायंस कंपनी विश्व की 500 सौभाग्यशाली कंपनी में शामिल है और मार्केट वैल्यू के हिसाब से भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है. वो विश्व की सबसे महँगी संपत्ति एन्टीलीया बिल्डिंग में रहते है. उन्होंने अपनी कंपनी का 44.7% स्टैक पकड़ कर रखा है. वे धीरुभाई अम्बानी के बड़े बेटे और अनिल अंबानी के भाई है. RIL विशेषतः पेट्रोलियम रसायन (Refining Petrochemical) और तेल और गैस क्षेत्र से समझौता करती है. रिलायंस रिटेल लिमिटेड जो RIL की ही एक सहायक कंपनी है, वह भी भारत की सबसे बड़ी रिटेलर कंपनी है.
2014 में, फोर्ब्स के 2010 के 100 सर्वाधिक शक्तिशाकी और ताकतवर लोगो की सूचि में उन्हें शामिल किया गया. वो फ़ोर्ब्स की “68 सबसे महत्वपूर्ण लोग” की सूचि में भी शामिल है. 2013 में वह भारत के सबसे अमिर और एशिया के दुसरे सबसे अमीर व्यक्ति कहलाये. अम्बानी ने अपने इस शीर्षक (भारत के सबसे अमीर व्यक्ति) को 9 सालो तक बरक़रार रखा. रिलायंस की ही तरह उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग की फ्रेंचाईसी मुंबई इंडियन्स को भी ख़रीदा. 2012 में, फ़ोर्ब्स ने उन्हें विश्व के सबसे अमिर “Sport Owner” का सम्मान दिया.
उन्होंने बैंक ऑफ़ अमेरिका कारपोरेशन और इंटरनेशनल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ़ फॉरेन रिलेशन के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर की तरह सेवा की. वे भारतीय मैनेजमेंट संस्था, बंगलौर के अध्यक्ष भी रह चुके है, जो भारत की सर्वोच्च व्यापार स्कूल के नाम से जानी जाती है.
Mukesh Ambani Life – मुकेश अंबानी का वैयक्तिक जीवन :
मुकेश अंबानी ने नीता अंबानी से शादी की और उन्हें दो बेटे और एक बेटी हुई ,जिनका नाम  ( Mukesh Ambani Son ) अनंत, आकाश और बेटी  ईशा है. वो अपने निजी मकान 27-स्टोरी बिल्डिंग, मुंबई में रहते है जिस बिल्डिंग का नाम एंटीलीया रखा गया है जिसकी विदेशी कीमत US$ 1 बिलियन है और ऐसा कहा जाता है की इतिहास की ये सबसे महँगी बिल्डिंग है.
31 मार्च 2012 के राजस्व वर्ष के अंत में, मुकेश ने ये बताया की रिलायंस इंडस्ट्री का मुख्य होने के नाते वो हर साल उनके 240 मिलियन पगार को त्याग देंगे. उन्होंने ऐसा प्रति वर्ष करने का इरादा किया ताकि वे अपने मैनेजमेंट को ज्यादा से ज्यादा सुविधाए प्रदान कर सके और अपनी इंडस्ट्री को और अधिक बढ़ा सके. और इस तरह से 4 थे वर्ष में लगभग 150 मिलियन पगार उन्होंने बचाया.
Mukesh Ambani Wealth Business Career – मुकेश अंबानी का बिज़नेस करियर :
1980 में, इंदिरा गाँधी की भारतीय सरकार ने PFY (Polyster Filament Yarn) को खोला ताकि प्राइवेट क्षेत्र विकसित हो सके. तभी धीरुभाई अंबानी ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया ताकि वे एक PFY प्लांट खोल सके. उस समय उस क्षेत्र में टाटा, बिरला और 43 दूसरी कंपनियों से कड़ी टक्कर के बावजूद वह लाइसेंस धीरुभाई को दिया गया. अपने इस PFY प्लांट को आगे बढ़ाने के लिए धीरुभाई को किसी की मदद की जरुरत थी इसलिए उन्होंने Stanford University में पढ़ रहे बेटे मुकेश अंबानी को अपनी मदद के लिये बुलाया. बाद में मुकेश ने रिलायंस पोलिस्टर में मदद करना बंद कर दिया और 1981 में फिर रिलायंस पेट्रोलियम रसायन को शुरू किया गया.
और  मुकेश अंबानी ने रिलायंस इन्फोकॉम लिमिटेड (अभी रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड) की स्थापना की. जिसका मुख्य उद्देश भारत के जानकारी और कम्युनिकेशन तंत्रज्ञान क्षेत्र में ध्यान देना था.
अंबानी आगे बढ़ते गये और उन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा पेट्रोलियम रिफायनरी, जामनगर, भारत में बनाया. जिसकी 660000 (33 मिलियन टन प्रति वर्ष) बैरल प्रति दिन भरने की क्षमता है, जो 2010 में भारत की सर्वाधिक प्रचलित पेट्रोलियम क्षेत्र और पॉवर जनरेशन के मामले में उच्च दर्जे की इंडस्ट्री थी.
18 जून 2014 को मुकेश अंबानी रिलायंस की 40 वे एनुअल जनरल मीटिंग को सम्बोधित करते हुए कहा की वो आने वाले 3 सालो में 1.8 ट्रिलियन रुपये अलग-अलग व्यवसाय में इन्वेस्ट करेगी साथ ही जल्द ही भारत में 2015 में 4G सर्विसेस भी लागु करेंगी.
Please Note :- अगर आपके पास Mukesh Ambani Biography In Hindi मैं और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट मैं लिखे हम इस अपडेट करते रहेंगे. धन्यवाद

Saturday, 11 March 2017

Narendra Modi Biography In Hindi | नरेन्द्र मोदी की जीवनी

पूरा नाम     –  नरेन्द्र दामोदरदास मोदी
जन्म          –  17 सितम्बर 1950
जन्मस्थान –  वडनगर, जि. मेहसाना (गुजरात).
पिता          –   दामोदरदास मूलचंद मोदी
माता          –   हीराबेन मोदी
विवाह        –   जशोदाबेन के साथ

नरेन्द्र मोदी की जीवनी – Narendra Modi Biography In Hindi

नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को वडनगर के मेहसाना जिले में पंसारी परिवार में हुआ, उनका परिवार मोड़-गंची-तेली संप्रदाय से संबंध रखता था, जो भारत सरकार के इतर पिछड़ा वर्ग में आते है. वो दामोदरदास मूलचंद (1915-1989) और हीराबेन मोदी (बी.सी. 1920) को हुए 6 बच्चो में से तीसरे थे. बच्चे होने के नाते नरेन्द्र मोदी वडनगर रेल्वे स्टेशन पर अपने पिता की चाय बेचने में मदत करते थे, और कुछ समय बाद में अपने भाई के साथ बस स्टैंड के पास खुद का चाय का स्टाल चलाना शुरू किया. उन्होंने अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा 1967 में वडनगर से ही प्राप्त की, उनके शिक्षक ने उनके बारे में बताया की वे एक साधारण विद्यार्थी के साथ एक जबरदस्त वाद-विवादी थे. वाद विवाद में उनकी वाक्पटुता के लिए शिक्षको ने उन्हें सम्मानित भी किया. मोदी नाटक बनाते समय कोई ऐसी भूमिका निभाते थे जो उनके जीवन से भी बड़ा हो, और इसी का प्रभाव उनके राजकीय जीवन पे भी पड़ा.
मोदीजी ने 8 साल की अल्पायु में RSS के स्थानीय शाखाओ में प्रशिक्षण हेतु उपस्थित रहना शुरू किया. और वहा उनकी मुलाकात लक्ष्मणराव इनामदार से हुई, जो वकील साहेब के नाम से भी जाने जाते थे, जिन्होंने मोदी को RSS का बालस्वयमसेवक भी नियुक्त किया, और वे मोदी के राजकीय सलाहकार भी बने. जब मोदी RSS में अपना प्रशिक्षण ले रहे थे तब वे वसंत गजेंद्रगडकर और नाथालाल जघदा, भारतीय जन संघ के नेताओ से भी मिले जो बाद में गुजरात में 1980 में बीजेपी के सदस्य बने.
और कम उम्र में ही उनका स्थानीय लड़की जशोदाबेन के साथ विवाह कर दिया गया, नरेन्द्र मोदी उसी समय हाई स्कूल से स्नातक हुए थे इसलिए उन्होंने अपने इस विवाह को अस्वीकार किया. और कुछ पारिवारिक उलझनों की वजह से 1967 में उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा. परिणाम स्वरुप उन्होंने अपने 2 उत्तरी और उत्तर-पूर्व की यात्रा करने में व्यतीत किये. साक्षात्कार में मोदी ने स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिंदु आश्रम का भी उल्लेख किया, और साथ ही कोलकाता के बेलूर मठ, अल्मोरा के अद्विता आश्रम और राजकोट के रामकृष्ण मिशन का भी उल्लेख किया. हर जगह पर बहोत कम समय तक ही रुके थे, क्यू की उनके पास कोई महाविद्यालयीन शिक्षण नहीं था. वे 1968 में बेलूर मठ पहोचे और जल्द ही वहा से निकाल गये, और मोदी ने सबसे जादा कलकत्ता, पश्चीम बंगाल और असम और गुवाहाटी के रास्तो पर यात्रा की. और फिर अंत में वे अल्मोरा के रामकृष्ण आश्रम गये, जहा उच्चशिक्षण ना होने के वजह से उन्हें दोबारा निकाला गया. और फिर वे दिल्ली और राजस्थान होते हुए 1968-69 में वापिस गुजरात आये. कभी-कभी वो 1969-70 के आस-पास अहमदाबाद छोड़ने से पहले एक-दो बार वडनगर देखने भी गये थे. वे बाद में अपने अंकल के साथ रहने लगे, जो गुजरात के रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन में ही काम करते थे. अहमदाबाद में मोदी ने इनामदार को फिर से अपना परिचय दिया, जो हेडगेवार भवन (RSS मुख्य कार्यालय) में मौजूद थे. 1971 के इंडो-पाक युद्ध के बाद, उन्होंने अपने अंकल के लिए काम करना बंद किया और और RSS के एक फुल टाइम प्रचारक बन गये. 1978 में ही मोदी RSS के संभाग प्रचारक बने और दिल्ली विद्यालय से राजनीती शास्त्र की डिग्री भी प्राप्त की. और पाच साल बाद उन्हें राजनीती शास्त्र में गुजरात विद्यालय से मास्टर और आट्र्स की डिग्री मिली.
नरेन्द्र मोदी / Narendra Modi का राजनीती को समर्पित जीवन —-
नरेन्द्र मोदी जी ने अपना पूरा जीवन 1971 में RSS join करने के बाद राजनीती को ही समर्पित किया. 1975-77 में जब राजनितिक झगडे चल रहे थे तब प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी में राज्यों में आपातकाल घोषित किया और RSS जैसी संघटनाओ को बंद करने कहा. तब मोदी ने गुप्त रूप से एक पुस्तक लिखी जिसका नाम “संघर्ष माँ गुजरात”, जिसमे उन्होंने गुजरात के राजनीती को वर्णित किया था. 1978 में, मोदी दिल्ली से राज्यशास्त्र में स्नातक हुए और गुजरात यूनिवर्सिटी में उनका मास्टरी का काम भी 1983 में खत्म किया.
1987 में नरेन्द्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए, बीजेपी में वे दिन ब दिन आगे बढ़ते गए और सामाजिक हितो के कई काम उन्होंने बीजेपी में रहकर किये. उन्होंने Business के Privatisation, छोटे Business को बढ़ावा दिया. 1995 में मोदी राष्ट्रीय मंत्री के रूप ने नियुक्त हुए, 1998 के चुनाव में बीजेपी को आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा हात था.
फेबुअरी 2002 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे थे. आने जाने वाली ट्रेन पर किसी ने अटैक किया, जो कथित रूप से मुस्लिमो ने किया था. और बदले के प्रतीशोध/ इरादे से गुलबर्ग के मुस्लिमो पर भी हमला किया गया. इस तरह हिंसा बढती गयी इस वजह से मोदी सरकार को उस समय कर्फ्यू की घोषणा करनी पड़ी. कुछ समय बाद दोनों ही समुदाय में शांति की स्थिति आई और तब मोदी सरकार की कई लोगो ने पुरे देश में आलोचना की क्यू की उस हमले में 1000 से भी ज्यादा मुस्लिम मारे गए थे. मोदी के विरुद्ध 2 जांच कमिटी गठित करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पाया की मोदी के विरुद्ध कोई गवाह नहीं है जिस से उन्हें दोषी ठहरा सके.
और बाद में मोदी 2007 और 2012 में पुनः गुजरात के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए. और तब से मोदी हिन्दित्वावादी बातो पर कम और आर्थिक development पर ज्यादा ध्यान देने लगे. गुजरात के विस्तार और प्रगतशील होने का श्रेय आज भी मोदी को ही दिया जाता है. आज उनका गुजरात मॉडल पुरे राष्ट्र में प्रसिद्द है. क्यू की उन्होंने गुजरात से गरीबी हटाकर वहा कामकाज बढाया.
 नरेन्द्र मोदी / Narendra Modi का प्रधानमंत्री नियुक्त होना
जून 2013 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की और से मोदी को प्रधानमंत्री उम्मेदवार घोषित किया गया. जहा कई लोगो ने पहले से ही उन्हें भारत का प्रधानमंत्री मान लिया था. क्यों की कई लोगो का मानना था की मोदी में भारत की आर्थिक स्थिति बदलने का और भारत का विकास करने की ताकत है और अंत में मई 2014 में उन्होंने और उनकी बीजेपी पार्टी में लोकसभा चुनाव में 534 में से 282 सीट प्राप्त कर इतिहासिक जित दर्ज की. और इसी जित के साथ उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को हराया, जो पिछले 60 सालो से भारतीय राजनीती को संभाल रही थी. और भारतीय जनता ने उस समय दिखा दिया था के वे उस समय मोदी के रूप में भारत में बदलाव लाना चाहते थे.
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Friday, 10 March 2017

महेंद्र सिंह धोनी जीवनी | MS Dhoni Biography In Hindi


पूरा नाम  – महेंद्र सिंह धोनी / Mahendra Singh Dhoni
जन्म     – 7 जुलाई 1981
जन्मस्थान – रांची, बिहार(झारखण्ड)
पिता     – पान सिंह
माता     – देवकी देवी
विवाह    – साक्षी सिंह रावत

महेंद्र सिंह धोनी जीवनी – MS Dhoni Biography In Hindi

धोनी एक भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान भारतीय अंतर्राष्ट्रीय टीम के कप्तान है. एक दाए हात के आक्रामक मध्यक्रम बल्लेबाज और विकेट-कीपर है, अपनी आक्रामक शैली से मैच को खत्म करने वाले बल्लेबाज के रूप में वे जाने जाते है. उन्होंने दिसम्बर 2004 से बांग्लादेश के विरुद्ध अपने एकदिवसीय क्रिकेट की शुरुवात की और अपना पहला टेस्ट क्रिकेट एक साल बाद ही श्रीलंका के विरुद्ध खेला.
Mahendra Singh Dhoni ने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम के कई रिकार्ड्स भी बनाये जैसे किसी भी कप्तान की तुलना ने उन्होंने भारत को एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक जीत दिलाई और साथ ही एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट में भारत को लगातार जीत दिलाते रहने वाले वे अकेले कप्तान है. उन्होंने 2007 में राहुल द्रविड़ से कप्तानी ली और अपनी कप्तानी में उन्होंने भारतीय टीम को श्रीलंका और न्यू-ज़ीलैण्ड में पहली दफा जीत का स्वाद चखाया. उनकी कप्तानी में, भारत ने 2007 ICC World Twenty20, CB सीरीज 2007-08, एशिया कप 2010, 2011 ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप और 2013 ICC चैंपियंस ट्राफी जीती. 2011 के वर्ल्ड कप फाइनल में धोनी ने 79 गेंदों में नाबाद 91 रन की पारी खेली जो भारत को विश्व चैंपियन बनाने के लिए बहोत मदतगार साबित हुई, और इस वजह से उन्हें उस मैच का “मैन ऑफ़ द मैच” का पुरस्कार नही दिया गया. जून 2013 में,इंग्लेंड में जब भारत ने चैंपियंस ट्राफी के फाइनल में इंग्लेंड को पराजित किया था, उसी वक़्त धोनी भारत को तीनो सिमित-ओवर की ट्राफी(वर्ल्ड कप चैंपियंस ट्राफी और वर्ल्ड ट्वेंटी-ट्वेंटी) दिलाने वाले पहले कप्तान बन गये थे. 2008 में टेस्ट मैचों की भी कप्तानी लेने के बाद उन्होंने टीम को सफलता के शिखर पर ले जाकर न्यू-ज़ीलैण्ड और वेस्ट-इंडीज में जीत दिलाई और साथ ही बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी 2008,2010 और 2013 में भी जीत दिलाई. 2009 में, धोनी ने पहली बार भारतीय टीम को टेस्ट रैंकिंग में पहले पायदान पर पहोचाया. 2013 में, उनकी कप्तानी में भारत 40 सालो बाद पहली ऐसी टीम बनी जिसने ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट मैचों में वाइट-वाश किया था. और इंडियन प्रीमियर लीग में वे चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान बने 2010 और 2011 के सीजन में इतिहास रचा और 2010 और 2014 की चैंपियंस लीग ट्वेंटी ट्वेंटी भी जीती. और उन्होंने दिसम्बर 2014 में टेस्ट क्रिकेट से अपने सन्यास की घोषणा की.
एयर इंडिया से निर्वासित (रिजाइन) करने के बाद, धोनी ने इंडिया सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड के उपाध्यक्ष का पद भी लिया है. इंडिया सीमेंट ये आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स की मालक है, और पहले आईपीएल सीजन से धोनी उस टीम के भी कप्तान है. धोनी इंडियन सुपर लीग टीम चेंनैयीं FC के सह-मालक भी है.
धोनी कई पुरस्कारों के हकदार रह चुके है, जिनमे 2008 और 2009 में ICC ODI प्लेयर ऑफ़ द इयर(दो बार ये पुरस्कार जितने वाले पहले खिलाडी), 2007 में राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड और पदम् श्री, 2009 में भारत के चौथे सिविलियन का सम्मान उन्हें प्राप्त है. उनका नाम 2009 के ICC वर्ल्ड टेस्ट इलेवन और ICC वर्ल्ड ODI इलेवन के कप्तान के रूप में भी रखा गया है. कपिल देव के बाद वे दुसरे भारतीय खिलाडी है जिन्हें इंडियन आर्मी का भी सम्मान पद मिला है. 2011 में, दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूचि में भी धोनी का नाम लिखा गया था. 2012 में, दुनिया के सबसे कीमती खिलाडियों में 16 वे नंबर पर है. जून 2015 में, फ़ोर्ब्स ने धोनी को सबसे ज्यादा कीमती खिलाडियों की सूचि में 23 वे नंबर पर रखा, और उनके अनुसार उनकी कमाई US$31 मिलियन रही.

महेंद्र सिंह धोनी का प्रारंभिक जीवन – Early Life Of MS Dhoni

धोनी का जन्म रांची, बिहार(झारखण्ड) में हुआ. उनके पिता का नाम पान सिंह व् माता श्रीमती देवकी देवी उनके पैत्रक गाव, लावली उत्तरखंड के अल्मोरा जिले के अंतर्गत लामगढ़ा ब्लाक में है. उनके पिता माता उत्तरखंड से रांची चले आये जहा उनके पिताजी श्री पण सिंह मेकोन कंपनी जे जूनियर मैनेजमेंट वर्ग में काम करने लगे. धोनी की एक बहन है जिनका नाम है जयंती और एक भाई है जिनका नाम है नरेंद्र. धोनी एडम गिलक्रिस्ट के बहोत बड़े फेन है, और उनके बचपन के आदर्श खिलाडी उनके अभी के सह-खिलाडी सचिन तेंदुलकर थे, और बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन उन्हें पसंद थे और गायक में वे लता मंगेशकर को पसंद करते थे.
धोनी दी ए वि जवाहर विद्यालय मंदिर, श्यामली, रांची, झारखण्ड में पढ़ते थे जहा उन्होंने शुरू से ही बैडमिंटन और फुटबॉल में अपना हुनर प्रदर्शन किया जिस कारन वे जिला व् क्लब लेवल में भी चुने गए. धोनी अपने फुटबॉल टीम के गोलकीपर भी रह चुके है. उन्हें लोकल क्रिकेट क्लब में क्रिकेट खेलने के लिए उनके फुटबॉल कोच ने भेजा था. हालाँकि उसने कभी क्रिकेट नहीं खेला था, फिर भी धोनी ने अपने विकेट-कीपिंग के कौशल से सबको प्रभावित किया और कमांडो क्रिकेट क्लब के (1995-1998) में नियमित विकेटकीपर बने. क्रिकेट क्लब में उनके अच्छे प्रदर्शन के कारन उन्हंप 1997-98 सीजन के विनु मांकड़ ट्राफी अंडर सिक्सटीन चैंपियनशिप में चुने गए जहा उन्होंने बहेतरिन प्रदर्शन किया. दसवी कक्षा के बाद ही धोनी ने क्रिकेट में अपना ध्यान दिया. धोनी दक्षिण रेलवे के 2001 से 2003 तक खरगपुर रेलवे स्टेशन पर टीटीई (ट्रेन टिकेट एग्जामिनर) रह चुके है, वे हमेशा उनकी शरराती हरकतों के लिए जाने जाते थे. एक बार, धोनी जब किसी स्टेशन के रेलवे क्वार्टर पर रह रहे थे, तब धोनी और उनके दोस्त ने खुद को सफ़ेद कम्बल से पूरी तरह ढक लिया था और देर रात तक स्टेशन पर घूम रहे थे. वहा पर उपस्थित पहरेदार उन्हें देख कर घबरा गया क्यू की उसे यकीं नहीं हो रहा था की इतनी रात में वहा कोई भुत घूम रहा है. उनकी यही शरारत दुसरे दिन एक बड़ी खबर बन गयी थी.
धोनी का वैयक्तिक जीवन / MS Dhoni Family & Personal Life
धोनी ने साक्षी सिंह रावत से शादी की जो उनकी दी. ए. वि. जवाहर विद्यालय मंदिर श्यामली में उनकी सहकर्मी थी. वो जन्मजात देहरादून, उत्तराखंड से थी. उनकी शादी के समय, वो होटल मैनेजमेंट की पढाई कर रही थी और प्रशिक्षक की तरह तेज बंगाल कोलकाता में काम कर रहीं थी. बाद में उनकी शादी हुई और धोनी 6 फेब्रुअरी 2015 को एक बेटी “जीवा” के पिता बने.
महेंद्र सिंह धोनी की खेल शैली – MS Dhoni Playing Style
धोनी एक आक्रमक दाये हात के बल्लेबाज और विकेटकीपर है. धोनी साधारणतः माध्यम वर्ग के बल्लेबाज है लेकिन मैच की दशा और दिशा देखकर वे अपने बेटिंग स्टाइल को बदलते रहते है. क्यू की एक कप्तान की तरह ये उनकी जवाबदारी है. वो एक शक्तिशाली हीटर और सबसे तेजी से रन बनाने वाले बल्लेबाजो में से एक है.
उनके विकेटकीपर की अनोखी स्टाइल को कई क्रिकेट विद्वानों ने भी सराहा. और उन्होंने अपनी विकेट कीपिंग से कई विश्व रिकार्ड्स भी बनाये.
निच्छित ही धोनी आने वाले युवा खिलाडियों के प्रेरणास्त्रोत है.
निच्छित ही धोनी आने वाले युवा खिलाडियों के प्रेरणास्त्रोत है. ऐसा नहीं है की धोनी शुरुवात से ही क्रिकेट जगत में सफल होते गये, उनके सामने कई चुनौतिया आई. कप्तान बनने के बाद कई बार लोगो ने उनकी आलोचना भी की. लेकिन उन्होंने उन आलोचनाओ की ओर ध्यान ना देते हुए अपने खेल को और अधिक सुन्दर बनाने का प्रयास किया. और पूरी भारतीय टीम को विश्व में प्रथम स्थान पर ला खड़ा किया. और आज वे पुरे भारत के चहेते बन गये है.
कई बार लोग किसी काम को इसी वजह से छोड़ देते है की जब वे वो काम करेंगे तो “लोग क्या कहेंगे?”. इस प्रश्न के दिमाग में आते ही कई लोग अपने काम को बिच में ही छोड़ देते है. लेकिन अगर हम किसी भी महापुरुष की जीवनी को देखे तो हमें ऐसा दिखेगा की उन्होंने किसी भी नए काम की शुरुवात लोगो की चिंता किये बिना ही शुरू किया. और बाद में जो लोग उनकी आलोचना करते थे वही लोग उनका साथ देने लगे.

    हमें जीवन में किसी की भी चिंता किये बिना, 100% अपने काम पर ही ध्यान देना चाहिये.
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    Wednesday, 8 March 2017

    कौन है वो लड़की, जिसके सामने Facebook, Samsung जैसी बड़ी कंपनियाँ सिर झुकाती है ?

    नमस्कार दोस्तों, आज हम अपने ब्लॉग के जरिए आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी हस्ती के बारे में जो शायद आप युवाओं के लिए प्रेरणा का काम करें एवं जिनका नाम शायद आप में से पहले किसी ने न सुना हो, या हो सकता है कि आपने सुना भी हो। जिन्होने सुना है उनकी नाॅलेज इनके बारे में और मजबूत हो जाएगी और जिन्होंने नहीं सुना है, उन्हें इनके बारे में पता चल जाएगा। इस हस्ती का नाम है shalini dubey.


    संक्षिप्त परिचय:-

    नाम:- SHALINI DUBEY

    जन्मस्थान:- वाशिंगटन डीसी, अमेरिका
    जन्मतिथि:- 15 अगस्त, सन 1995
    नागरिकता:- अमेरिकी
    पेशा:- बिजनेस बुमैन, अमेरिकी अधिकारी
    कुल संपत्ति:- 25 हजार करोड़ रुपये(अनुमानित)
    जीवनसाथी:- दीपांशु तिवारी

    ऊपर दी हुई फोटो देखकर आपको यह लग रहा होगा कि ये कोई माॅडल या हालीवुड फिल्म एक्ट्रेस हैं तो आपको बता दें कि ये हैं shalini dubey, पेशे से व्यवसायी हैं और मात्र 21 बर्ष की उम्र में 25000 करोड की संपत्ति होना इनके परिश्रम की कहानी बताता है।
    इससे पहले कि हम यह बताएं यह महान क्यों हैं, आपको इनके जीवन के कुछ पहलुओं से परिचित करा देते हैं।
    आरंभिक जीवन:- शालिनी दुबे एक अमेरिकन ईसाई माता और भारतीय हिंदू पिता की संतान हैं। इनके NRI पिताजी कानपुर उत्तर प्रदेश के निवासी थे एवं भारतीय विदेश सेवा में कार्यरत थे और माताजी वाशिंगटन कीं। अमेरिकी होने के बाबजूद उन्हें अपना प्यार भारत में मिला। उनके बाॅय फ्रेंड ‘दीपांशु तिवारी’ रियल एस्टेट सेक्टर के जाने माने नाम ‘श्री राजाबाबू तिवारी’ के नाती और उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री ‘श्री नारायण दत्त तिवारी’ के परिवार से हैं।
    शिक्षा:- उनकी आरंभिक शिक्षा अमेरिका के ‘जेम्स वुड हाइस्कूल’ में ही हुई एवं उच्च शिक्षा के लिए ‘आईआईटी दिल्ली’ में बैचलर डिग्री के लिए विदेशी कोटे के तहत एडमीशन लिया। हालांकि उन्होंने कुछ कारणों के चलते यहां पढाई छोड़कर वापस अमेरिका लौट गईं। अपनी पढाई बीच में ही छोडने के बाबजूद उन्हें विश्व के चार विश्वविधालयों ने ‘डाॅक्टरेट’ की उपाधि से सम्मानित किया है।
    बिजनेस:- अमेरिका में जाने के बाद उन्होने मात्र 16 बर्ष की उम्र में अपनी एक सुपरमार्केट सीरीज खोली हालांकि बिजनेस का कोई एक्सपीरियंस न होने की वजह से जल्दी ही यह सीरीज दिवालिया हो गई लेकिन उन्होने यह दिवालिया सीरीज वालमार्ट ग्रुप को बेचकर उससे मिला हुआ पैसा एक साफ्टवेयर कंपनी ‘HIDEMYASS’ में निवेश किया और यहां से शुरू हुई उनकी सफलता की कहानी, उनके इंवेस्टमेंट ने अच्छे रिटर्न दिए और उसी साल सन 2010 में उन्होने लगातार घाटे में जाते ब्रांड ‘केल्वीन क्लेन’ में लगभग 32% हिस्सेदारी बतौर सायलेंट पार्टनर खरीदी। इसके बाद से आज तक केल्वीन क्लेन कभी घाटे में नहीं गया। सन 2011 में उन्होंने ATM और क्रेडिट कार्ड बनाने बाली प्रमुख कंपनी ‘VISA’ के 13% शेयर बतौर सायलेंट पार्टनर ही खरीदे। उसके बाद उन्होने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा जिसके कारण आज उनकी हवाईजहाज बनाने वाली कंपनी ‘Boing’, प्रीमियम सन ग्लासेज बनाने बाली कंपनी ‘Rayban’, हैलीकॉप्टर्स बनाने बाली ‘Bell Helicopters’, विश्व की सबसे बडी जर्मन एयरलाइंस ‘Lufthansa’, आटोमोबाइल कंपनी ‘TOYOTA’ एंटरटेनमेंट कंपनी ‘Marvel’ और ग्लोबल एजुकेशनल सर्च इंजन ask.com में बतौर सायलेंट पार्टनर अच्छी खासी हिस्सेदारी है। इसके अलावा भी उनकी कई और कंपनियों में हिस्सेदारी है।
    इंवेस्टमेंट– वे कंपनियों की मालकिन होने के साथ साथ बडे पैमाने पर स्टार्ट अप कंपनियों में निवेश भी करतीं हैं। उनकी निवेश की हुईं अधिकतर कंपनियां भारतीय हैं जिनमें ‘Healthkart’, और ‘Imazesbazzar’ प्रमुख हैं। इसके अलावा वे फाइव स्टार होटल चेन ‘The Lalit’ की सबसे बडी निवेशक हैं।
    कुछ अन्य तथ्य:
    1- हालांकि वे ‘Simple Living and High thinking’ में विश्वास रखतीं हैं लेकिन वे लक्जरी गाडियों की बहुत शौकीन हैं। उनके बेड़े में 13 लग्जरी गाडियां और 2 शानदार प्राइवेट जेट्स हैं।
    2– बिजनेस टायकून होने के बाबजूद उन्होने अमेरिका की सेना और अमेरिकन एयरफोर्स में एक साल तक अपनी सेवाएं दीं हैं। वे अमेरिकी सेना की तीसरी सबसे बडी हथियार सप्लायर हैं।
    3– अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा उनकी बहुत इज्जत करते हैं, वे उनकी अत्यंत करीबी इंसानों में से एक हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे इकलौती ऐसी शख्शियत हैं जिनके लिए ओबामा अपनी कुर्सी छोडकर खडे हो जाते हैं। वे आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति के पद हेतु प्रबल दावेदार माने जा रहे ‘डोनाल्ड ट्रंप’ कीं भी बिजनेस पार्टनर हैं।
    4– बिजनेस टायकून होने के अलाबा उन्हें अमेरिकी सरकार ने कई महत्वपूर्ण पद दे रखे हैं। Central Intelligence Agency की cyber security विभाग कीं प्रमुख हैं। वे White House की सुरक्षा कंसल्टेंट भीं हैं।
    5– वे जिन कंपनियों की मालकिन हैं, उनके प्रोडक्ट का उपयोग कभी नहीं करतीं।
    6– एक बार उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘Forbes’ पर केस कर दिया था क्योंकि पत्रिका ने उनकी संपत्ति बिना अनुमति से छाप दी थी। जैसा कि सबको अंदाजा था, फैसला शालिनी दुबे के पक्ष में ही आया। तब से उनके बारे में कोई अखबार, पत्रिका  या बेबसाइट बिना उनकी या उनके बाॅय फ्रेंड की अनुमति के नहीं लिखती।
    7– वे सभी कंपनियो में बतौर सायलेंट पार्टनर ही जुडती हैं और इसके बारे में उनका कहना है कि इससे उन्हें मीडिया की रिपोर्ट में आने से आजादी मिलती है और काम भी कम होता है।
    8– shalini dubey बच्चों से बहुत प्रेम करतीं हैं। उन्होने 30 बच्चों को गोद ले रखा है जिन्हें वे अपने साथ ही रखतीं हैं। वे हर साल दुनियाभर के बच्चों के लिए लगभग 2000 करोड दान में देतीं हैं।
    9– हालीवुड का लगभग 13% बिजनेस किसी न किसी तरह से उनके हांथ से होकर जाता है।
    shalini dubey के बारे में पढकर आपको यह तो पता चल ही गया होगा कि सफलता के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती  यदि आपमें कुछ कर दिखाने का जज्बा है। साथ ही सफलता मिलना कोई आसान काम नही है, बहुत मेहनत करनी पड़ती है मेरे दोस्त इस सफलता के लिए।
    अगर आप एक बार असफल होते हैं तो आपको हार नहीं माननी चाहिए बल्कि फिर से कोशिश करनी चाहिए क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।