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Tuesday, 5 September 2017

Hardik Pandya Biography in Hindi – हार्दिक पांड्या की जीवनी


“जिंदगी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। मैं हमेशा एक King की तरह जीने की कोशिश करूंगा। चाहे मेरे पास पैसे हो या ना हो। मेरे जीने का तरीका यही रहेगा। इसलिए जो एक बार किंग होता है, वह हमेशा के लिए किंग ही होता है।” 

यह Hardik Pandya का Whatsapp Status था। वाकये में जिस तरह से Hardik Pandya बेखौफ Performance देते जा रहे है, उसके सामने Indian Cricket Team के लिए सालों से खेलने वाले Suresh Raina, Ravindra Jadeja जैसे खिलाड़ियों के परफ़ोर्मेंस फीके पड़ते जा रहे है।

आज हार्दिक Virat Kohli और Mahendra Singh Dhoni की कतार में खड़े नजर आते है। अब आप इस Hindi Biography द्वारा हार्दिक पाण्ड्या के मस्तमौला जीवन को जानेंगे।




Hardik Pandya Hindi Biography (Wiki)

Hardik Pandya का Early Life & Family

हार्दिक पाण्ड्या का जन्म छोर्यसी, सूरत, गुजरात में हुआ था। उनके पिता हिमांशु पाण्ड्या कार से रिलेटिड़ बिजनेसमेन थे।
उनका एक बड़ा भाई भी है – Krunal Pandya। पर वे कंधे के प्रोब्लेम से पीड़ित होने के कारण  मार्च 2015 से एक भी Cricket Match नहीं खेल सके।
बचपन से ही दोनों भाई Cricket के बड़े जुनूनी आशिक थे। इसलिए उन दोनों के जुनून के खातिर उनके पिता ने सूरत में अपने कार बिजेनेस को छोड़कर बरौदा में शिफ्ट हो गए, जहां उन्होंने अपने दोनों बेटों को India के पूर्व क्रिकेटर Kiran More के Cricket Academy भर्ती करा दिया।
किरण मोरे उनके पिता की कमजोर फाइनेसियल स्थिति को अच्छी तरह से जानते थे और वे दोनों भाइयों की प्रारंभिक उम्दा परफ़ोर्मेंस से काफी प्रभावित भी थे। जिस कारण उन्होंने उन दोनों भाइयों की तीन साल की अकेडमी फीस को माफ कर दिया।
हार्दिक अपने भाई से बेहतर थे। उनके भाई कहते है,
बचपन से ही उसमें गज़ब का कोन्फ़िडेंस और प्रैशर में अच्छा करने की अदभूत क्षमता हैं। जिसके कारण वो कई Club Cricket Matches को अकेले अपने दम पर जीता चुका है।
वे बेहतर परफ़ोर्मेंस के साथ कई First Class और List A मैच खेल चुके है।

Independence Day Wishes
(Quick Fact) Hardik Pandya’s Date of Birth – October 11, 1993

Hardik Pandya की Life Changing Moment

पर 2013-14 के Syed Mushtaq Ali Trophy की ओपनिंग मैच ने उनके जिंदगी को बदल कर रख दिया।
उस मैच में बरौदा जल्दी ही मात्र 20 रनों पर 2 विकेट गंवा चुका था। जिसके कारण बरौदा पर संकट के बादल मंडरा रहे थे।
ऐसे में पांचवें ओवर में हार्दिक बैटिंग करने आए। जहां उन्होंने India के बेस्ट तेज बैटरी जहीर खान, धवल कुलकर्णी और प्रवीण तांबे के घातक बॉलों का सामना करते हुए नॉट आउट 52 बॉलों में 82 रन बनाये और एक समय हार की कगार पर खड़ी बरौदा की टीम को जीता ले गए।
उनकी इस परफ़ोर्मेंस ने उन्हें Limelight में ला दिया, जिसके  कारण वे वर्तमान से लेकर पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों के बीच चर्चा के विषय बन गए।
इस परफ़ोर्मेंस से Mumbai Indians के कोच जॉन राइट इतने प्रभावित थे कि, वे हार्दिक के दूसरे मैच को भी देखने गए। जहां उन्हें हार्दिक ने निराश नहीं किया।
उस मैच में उन्होंने One of the best bowling figure 4-1-7-3 से बॉलिंग की और बैटिंग में कुछ अच्छे हाथ दिखाते हुए 37 रन बनाए। जो किसी भी All Rounder के लिए सबसे अच्छी परफ़ोर्मेंस से कम ना था।
मुंबई के लिए खेलने वाले और IPL ड्रेसिंग रूम में हार्दिक के पार्टनर रहे अदित्या तारे का उनके बारे में कहना है
वे पूर्ण विश्वाश के साथ अच्छी बैटिंग करते है। जिसके कारण हम उन्हें जानते है। वे दूसरे बरौदा खिलाड़ियों से अलग है। उनकी बैटिंग में क्वालिटी है, जो उनकी हर इनिंग में शो होता है
(Quick Fact) Hardik Pandya Ages – 22 years (2016)

IPL में Hardik Pandya

2014 के सीजन में Mumbai Indians ने उन्हें घायल खिलाड़ियों के backup के तौर पर प्रैक्टिस कैंप में रखा और उन्होंने मात्र 15 दिन में ही अपनी बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग से सबको प्रभावित कर दिया।
उन्हें अगले आईपीएल सीजन के लिए मुंबई इंडियंस ने 10 लाख की बेस प्राइस पर खरीद लिया।
Mumbai Indians में बिताए शुरुआती दिनों को याद करते हुए हार्दिक कहते है,
मुझे विश्वाश नहीं हो रहा था कि मैं अपने सपनों के स्टार से इतने नजदीक से मिल रहा था। और मैं बेहद खुश था कि मैं उस टीम का पार्ट था, जिस टीम में रिकी पोंटिंग, सचिन तेंदुलकर, रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी थे।
आप उनके अनलिमिटेड कोन्फ़िडेंस का अनुमान इस बात से लगा सकते है कि उन्होंने आईपीएल में बैंगलोर के खिलाफ Debut match में दूसरी गेंद ही पर मिड विकेट के ऊपर से शानदार छक्का मारा और धमाकेदार 6 गेंदों पर 16 रन बनाए, जो मुंबई इंडियंस की जीत के लिए काफी था।
इस तरह उन्होंने आईपीएल में One Man Army की तरह कई मैच जिताए। जिसकी तारीफ अक्सर उनके टीम कोच रिकी पोंटिंग किया करते थे।
एक मुलाक़ात में सचिन ने यहाँ तक कह दिया कि वह अगले 18 महीनों में इंडियन टीम में होगा। बाखुदा उस बात को एक साल भी नहीं हुए आज वो इंडिया के लिए खेल रहे है और कई मैचों में देशवाशियों के दिल भी जीत चुके है।
(Quick Fact) Hardik Pandya Height & Weight – 5’8″ & 65 Kg

Hardik Pandya ‘s Personal Life & Girlfriend

धोनी की तरह हार्दिक स्वभाव से बड़े शांत है, जो उनके चेहरे पर प्रेशर गेम में भी दिखता है। पर वे बहुत ही मस्तमौला है। वे हर मुमेंट को एंजॉय करने की कोशिश करते है।
इरफान पठान और युसुफ पठान उनके बहुत ही करीबी दोस्त है। पर अब तक उनका कोई Girlfriend नहीं है।
पर खबरों की माने तो वे कोलकाता में जमशेदपुर की 21 वर्षीय Model Lisha Sharma को दिल दे चुके है।

Hardik Pandya Love Healthy and Tasty Gujarati Dishes
(Quick Fact) Hardik Pandya’s Girlfriend- Lisha Sharma 

कुछ सवाल-जवाब

क्या वे स्मोक करते है – नहीं
क्या वे एल्कोहोल लेते है – नहीं
पसंदीदा खिलाड़ी – सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह
(Quick Fact) Hardik Pandya WT20 Debut Match – January 26, 2016 Against Australia

Monday, 4 September 2017

Flipkart Success Story in Hindi – Sachin Bansal & Binny Bansal Biography

Flipkart Success Story in Hindi – Sachin Bansal & Binny Bansal Biography

बहुत ही कम लोग होंगे जो इस कंपनी के नाम से वाकिफ नहीं होंगे. 2007 में इस कंपनी की शुरुआत हुई जो कि सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने मिलकर की थी. सचिन बंसल का जन्म चंडीगढ़ में हुआ था. उनके पिता एक बिजनेसमैन है और उनकी माँ एक हाउसवाइफ. सचिन बंसल ने अपना ग्रेजुएशन IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस से किया था. IIT दिल्ली में पढ़ने की वजह से उन्हें अपने करियर के लिए टेंशन लेने की जरुरत तो बिलकुल भी नहीं थी.




बिन्नी बंसल ने भी उन्ही के साथ IIT से पढ़ाई की थी और वो भी चंडीगढ़ से है. दोनों के बैकग्राउंड सेम होने की वजह से वे एक दूसरे को बहुत अच्छे से समझते है जो की एक पार्टनरशिप में बहुत महत्पूर्ण भूमिका निभाता है. पढ़ाई के बाद सचिन बंसल और बिन्नी बंसल दोनों एक साथ amazon के लिए काम करते थे जो की दुनिया की सबसे बड़ी e-commerce कंपनी है. Amazon में काम करते समय ही उन्हें खुद की कंपनी खोलने का विचार आया और अपनी कंपनी खोलने के लिए सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने एक साथ कंपनी को छोड़ दिया. यह एक बड़ा रिस्क तो था लेकिन कहते है न की जो बड़ा रिस्क उठाने का साहस नहीं रखते, वे जीवन में कुछ हासिल नहीं कर सकते.
सचिन बंसल और बिन्नी बंसल दोनों ने मिलकर 5 September 2007 को अपनी एक कंपनी खोली जिसका नाम उन्होंने फ्लिपकार्ट रखा. जब यह कंपनी आयी थी तब भारत में ना के बराबर ही e – commerce कंपनी थी और जो पहले से कंपनी थी भी तो वह लोगो की मानसिकता के कारण फ़ैल हो रही थी. उस समय लोगो की सोच थी की कोई भी वस्तु बिना देखे और बिना छुए कैसे खरीदी जा सकती है. सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने लोगो की मानसिकता cash on delivery ला कर बदल दी जो की भारत में पहली बार था. इससे पहले भारत में ऑनलाइन साइट केवल डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से पैसे लेती थी जिस पर लोग जयादा भरोसा नहीं करते थे. यह कंपनी 2007 ने किताब बेचने से शुरू हुई थी. शुरू में खुद सचिन बंसल और बिन्नी बंसल स्कूटर से किताबो की बिक्री करने जाते थे और बुकशॉप के सामने खड़े होकर पम्पलेट बाटा करते थे. सचिन बंसल और बिन्नी बंसल की मेहनत रंग लाई और 2008 में filpkart ने 40 मिलियन की बिक्री कर दी. ऐसा देखने के बाद इन्वेस्टर भी कंपनी की तरफ आकर्षित हुए जिससे flipkart ने बहुत सारी funding हासिल की. उसके बाद इस कंपनी ने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और इसकी ग्रोथ कई गुना हो गयी.


2014 में फ्लिपकार्ट ने Myntra.com और कई साइट्स को खरीद लिया. अब फिल्पकार्ट पर Fashion, एसेसरीज, Computer, Mobile से लेकर हमारी जरुरत की हर चीजे मिलती है. 2016 में Flipkart की बिक्री 40 बिलियन तक पहुंच गयी.  इस कंपनी में 15000 से जयादा लोग काम करते है. आप फ्लिपकार्ट की अपार सफलता से तो समझ गये होंगे की इस दुनिया में कोई भी काम असंभव नहीं है जरुरत है तो बस सच्ची लगन की क्योकि सच्ची लगन से जो काम किया जाये उसमे सफलता जरूर मिलती है.

Saturday, 2 September 2017

बॉलीवुड की Queen Katrina Kaif Biography in hindi

Katrina Kaif biography in hindi

Katrina Kaif भी ऐसी कुछ एक bollywood actresses में शामिल है जिनको फिल्म इंडस्ट्री में सबसे अधिक वेतन मिलता है | ठीक वैसे ही जैसे कंगना रानौत और प्रियंका चोपड़ा है | हालाँकि कैटरीना कैफ के शुरूआती दौर की बात करें तो यह ठीक वैसे ही है जैसे कि किसी भी न्यूकमर के लिए होता है और जाहिर सी बात है सफलता अगर इतनी आसानी से मिलती तो उसके लिए बाद में होने वाली ख़ुशी और मुकाम किसी के लिए इतना मायने क्यूँ रखता यही वजह है कि अपनी पहली हिंदी फिल्म करने के बाद कैटरीना या किसी को भी ऐसा नहीं लगा होगा कि यह लड़की इतनी आगे भी जाएगी कि एक दिन सबसे अधिक वेतन पाने वाली अभिनेत्री और सफल अभिनेत्री के तौर पर खुद को स्थापित कर लेगी | लेकिन कैटरीना ने अपनी मेहनत और लगन के चलते ऐसा करके दिखाया है | तो चलिए इस कमाल की अभिनेत्री के बारे में कुछ और बाते हम आज की इस पोस्ट “ Katrina Kaif biography in hindi “ में जानते है और जिनकी जिन्दगी से जुडी कुछ रोचक जानकारियां भी –



Family and Early life / परिवार और सामान्य जानकारी – 16 July 1983 में हांगकांग में जन्म लेने वाली कैटरीना कैफ का नाम है Katrina Turquotte और यह नाम इनके माँ के surname की वजह से है और इनके माता पिता के बारे में बात करें तो इनके पिता मोहम्मद कैफ मूल रूप से कश्मीरी है और इनकी मात्र सुजेन जो कि ब्रिटेन की एक वकील और सामाजिक कार्यकर्त्ता थी | कैटरीना के अनुसार इनकी माता और पिता का तलाक जब ये बहुत छोटी थी तभी हो गया था और माँ ही ही हम सात भाई बहनों की परवरिश की थी | जब ये भारत नहीं आई थी तब अपने माँ के ही surname का इस्तेमाल किया करती थी लेकिन जब भारत आई तो इन्होने आपने नाम को बदलकर Katrina Kaif कर लिया क्योंकि एक तो भारत में पिता के नाम को अपनाने का चलन है और साथ ही इस surname के साथ भारत में लोग इनके नाम को सहजता से बुला भी पाएंगे तो कैटरीना ने अपने नाम के साथ पिता का surname जोड़ दिया | कैटरीना के परिवार में उनके अलावा तीन बड़ी बहन (स्टेफ़नी, क्रिस्टीन और नताशा), तीन छोटी बहन (मेलिस्सा, सोनिया और इसाबेल) और एक बड़ा भाई जिसका नाम माइकल है।

चूँकि Katrina Kaif के पिता का तभी तलाक हो गया था जब कैटरीना छोटी थी जिसकी वजह से उन्हें पिता से कम ही लगाव था और शायद ही कभी अपने पिता के touch में ही रही हो ऐसे में कैटरीना ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब मैं देखती थी कि मेरे बाकि दोस्तों के माता पिता दोनों उनका बड़ा सपोर्ट करते है और उनके पिता एक बेहद अलग अहमियत रखते है तो मैं सोचती थी कि काश मैं भी इनमे से एक होती लेकिन मैंने कभी जिन्दगी से शिकायत नहीं कि और उन चीजो पर ध्यान दिया जो मेरे पास है बजाय उनके जो नहीं है | Katrina Kaif  की माँ चूँकि एक सामाजिक कार्यकर्त्ता थी जिसकी वजह से उन्हें एक से दूसरे देश में शिफ्ट होना पड़ता था जिसकी वजह से कैटरीना चीन , जापान , फ्रांस और स्विजरलैंड में रह चुकी है लेकिन बहुत से देशो में रहने के बाद वो वापिस लन्दन शिफ्ट हो गयी और उसके तीन साल बाद वो भारत आई | उनके बार बार जगह बदलने की वजह से ही कैटरीना और उनके भाई बहन को घर पर ही शुरूआती शिक्षा मिली |


Career, struggle and success / कैरियर संघर्ष और सफलता – जब Katrina Kaif 14 साल की थी तभी और उस समय में वो हवाई में थी तब उन्होंने एक ब्यूटी कांटेस्ट जीता और बेहद खुबसूरत होने की वजह से उन्हें कई सारे मोडलिंग प्रस्ताव भी मिलने लगे और सबसे पहले उन्हें किसी ज्वेलरी कम्पनी की और से काम मिला और इसके बाद वो लन्दन भी बतौर कैरियर इसे अपनाने लगी | एक दिन एक लंदन बेस्ड फ़िल्मकार Kaizad Gustad ने उन्हें notice किया और फिल्म boom में एक रोल ऑफर किया जो वाकई एक सुपर फ्लॉप फिल्म बाद में निकली | लेकिन Katrina Kaif  ने इसे लेकर हार नहीं मानी क्योंकि उनके पास उस समय मोडलिंग की दुनिया के दरवाजे खुले और उनके पास काम की कमी नहीं थी जिसकी वजह से उन्हें ऑफर मिलते रहे और वो मोडलिंग में सफल थी | दूसरी बात कि चूँकि कैटरीना की hindi भी इतनी अच्छी नहीं थी जिसकी वजह से कोई भी फिल्मकार उन्हें फिल्म में रोल देने से डरते थे | लेकिन बाद में कैटरीना ने Malliswari नाम की एक तेलुगु फिल्म की जिसके लिए उन्हें भारी भरकम रकम भी अदा की गयी और यह किसी भी साउथ इंडियन actress को दिए जाने वाले वेतन से कंही अधिक थी | हालाँकि Katrina Kaif  के अभिनय की किसी ने तारीफ नहीं कि लेकिन फिर भी यह फिल्म सफल रही थी | उन्हें अख़बारों में और मीडिया में फिल्म के रिव्यु के दौरान “ कमजोर और भावहीन अभिनय “ का तमगा दिया गया | जिसके बाद कैटरीना ने सबसे पहले अपनी हिंदी ठीक करने का सोचा और हिंदी की क्लासेज लेना शुरू कर दिया | और अपनी पहली फिल्म के बारे में कैटरीना का कहना है कि “ मैं उसे अपनी फिल्मो में शामिल नहीं मानती हूँ क्योंकि जिस समय मैंने उसे किया था मुझे नहीं पता था कि भारतीय दर्शक किस तरह के होते है और वो अपने पात्रों से क्या उम्मीद रखते है  |”
उसके बाद Katrina Kaif  ने ‘सरकार’ और ‘मैंने प्यार क्यूँ किया ‘  जैसी फिल्मे की जिसके लिए उन्हें Stardust Award भी दिया गया उसके बाद कैटरीना ने कई सारी सफल असफल फिल्मे की और उनके अभिनय की तारीफ की गयी क्योंकि उन्होंने अपनी hindi को भी अब बेहतर कर लिया था  | उनकी एक फिल्म के लिए उन्हें सराहा भी गया Namastey London के लिए जिसके लिए कहा गया कि ये ऐसी फिल्म है जिसमे लगता है कि उनका पात्र पर कोई अधिकार है |  
Personal Life / निजी जिन्दगी – कैटरीना की निजी जिन्दगी हमेशा मीडिया के लिए एक गॉसिप का विषय रही है लेकिन फिर भी कैटरीना मानती है कि उनकी निजी जिन्दगी जो है वो शादी से पहले ऐसी है कि मैं उसकी गरिमा बनाये रखना चाहती हूँ और इसी वजह से मैं अपनी personal life को अपने काम से अलग देखती हूँ | कैटरीना का नाम सलमान के साथ भी जोड़ा गया था और इस बारे में Katrina Kaif  द्वारा 2010  में सलमान से ब्रेकअप हो जाने के बाद खुलकर कहा गया कि यह उनका पहला सीरियस अफेयर था | लेकिन इसके बाद भी सलमान और वो काफी अच्छे दोस्त है यह कैटरीना की तरह से कहा गया और सलमान के बारे में वो इस तरह से अपनी राय को रखती है कि  “ वो हमेशा मेरे अच्छे दोस्त और गाइड की तरह रहे है और मेरे कैरियर में उनका अहम् योगदान है और उनकी हर सलाह मेरे लिए बहुत मायने रखती है और उनका मेरी जिन्दगी के उपर बहुत गहरा प्रभाव है |”
Katrina Kaif  का india में खुद का कोई घर नहीं है क्योंकि उन्होंने लन्दन में अपने लिए प्रोपर्टी बनाई है और साथ ही वो अपने परिवार के साथ बेहद जुड़ाव रखती है और चूँकि उनकी माँ एक ईसाई है और पिता मुसलमान जिसकी वजह से वो हर तरह के धर्म के बारे में समान विचार रखती है और उन्हें मंदिर , चर्च या मस्जिद या अन्य किसी भी धार्मिक स्थल पर जाते हुए देखा गया है | वो ऐसा तब भी करती है जब वो अपनी किसी भी फिल्म के रिलीज़ होने से पहले दुआ करने जाती है |

Social Causes / सामाजिक कार्य – कैटरीना अपनी माँ के द्वारा चलाये गये Relief Projects India नाम के ट्रस्ट में भी अपना सहयोग देती है जो छोड़ी ही बच्चियो और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए काम करती है | इसके अलावा कैटरीना और भी कई तरह के चैरिटी शो में हिस्सा लेती है |
Katrina Kaif Social Profile – Twitter Facebook Google Plus (यह Katrina Kaif  के ऑफिसियल अकाउंट नहीं बल्कि फैन पेज है |)

Thursday, 31 August 2017

बॉलीवुड की बेबो करीना कपूर की अनसुनी कहानी | Kareena Kapoor Biography In Hindi

Kareena Kapoor – करीना कपूर अपने वैवाहिक नाम करीना कपूर खान के नाम से भी जानी जाती है, वह भारतीय हिंदी फिल्मो की अभिनेत्री है। वह अभिनेता रणधीर कपूर और बबिता की बेटी है और अभिनेत्री करिश्मा कपूर की छोटी बहन भी है। रोमांटिक, कॉमेडी से लेकर क्राइम ड्रामा जैसी कई फिल्मो में करीना ने अलग-अलग किरदार को बखूभी निभाया है। कपूर को बहोत से पुरस्कार भी मिल चुके है जिनमे 6 फिल्मफेयर अवार्ड भी शामिल है, वह बॉलीवुड की सबसे प्रसिद्ध और सर्वाधिक फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में भी शामिल है।


करीना कपूर की अनसुनी कहानी / Kareena Kapoor Biography In Hindi


2000 में युद्ध पर आधारित फ़िल्म रिफ्यूजी से करीना ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुवात की थी और इसके बाद इतिहासिक ड्रामा फ़िल्म अशोका में अपने किरदार में उन्होंने अभिनय से जान डाल दी थी और हिंदी सिनेमा को उन्होंने खुद को साबित किया था। उनकी यह फ़िल्म उस समय ब्लाकबस्टर साबित हुई थी। इसके बाद उन्होंने एक और ब्लाकबस्टर फ़िल्म कभी ख़ुशी कभी गम (2001) भी की थी। अपने करियर में जल्द ही सफलता पाने वाली इस अभिनेत्री को बाद में असफलता का सामना करना पड़ रहा था, उन्हें फिल्मो में भी एक ही तरह के किरदार मिलते थे, जिससे दर्शको के बीच उनको नकारात्मक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ता था।
वर्ष 2004 करीना के जीवन में टर्निंग पॉइंट बनकर आया था। इस साल उन्होंने एक सेक्स वर्कर पर आधारित ड्रामा फ़िल्म चमेली की थी। इसके बाद 2004 में ही आयी फिप्म देव में उनके किरदार की काफी आलोचना को गयी थी, इसके बाद उन्होंने 2006 में आयी फ़िल्म ओमकारा भी की थी, जो क्राइम पर आधारित थी। 2007 में रोमांटिक कॉमेडी जब वी मेट और 2010 को ड्रामा वी आर फॅमिली के लिए उन्हें फ़िल्म फेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड और बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवार्ड भी मिला। भारत की 4 सबसे सफल फिल्मो में भी करीना ने मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई है – 2009 की कॉमेडी-ड्रामा 3 इडियट्स, 2011 की रोमांटिक ड्रामा बॉडीगार्ड, 2011 की साइंस फिक्शन रा.वन और 2015 की सोशल ड्रामा बजरंगी भाईजान। इसके साथ ही 2009 में आई थ्रिलर फ़िल्म कुर्बान और 2012 की ड्रामा फ़िल्म हेरोइन में उनके किरदार की काफी प्रशंसा भी की गयी थी।
उन्होंने अभिनेता सैफ अली खान से शादी की, कपूर की परदे के पीछे की ज़िन्दगी हमेशा से ही खबरों का कारण बनी हुई है। मीडिया में वे कभी अपना मुह नही खोलती और ना ही कुछ बोलना चाहती है और अपने किरदार और फैशन स्टाइल के जरिये वर दर्शको को आकर्षित करना चाहती है। कपूर एक स्टेज परफ़ॉर्मर और 3 किताबो की सह-लेखक भी है – इनमे एक जीवनी पर आधारित किताब और दो न्यूट्रिशन गाइड की किताबे है। रिटेल चैन ग्लोब्स (Globus) के साथ मिलकर उन्होंने खुद की कपड़ो की एक लाइन / रेंज भी शुरू की है।

21 सितम्बर 1980 को कपूर का जन्म मुम्बई के एक फ़िल्मी परिवार में हुआ था, कपूर (इन्हें बेबो के नाम से भी जाना जाता है) रणधीर कपूर और बबिता की सबसे छोटी बेटी है। उनकी बड़ी बहन करिश्मा भी एक अभिनेत्री है। अभिनेता और फ़िल्म निर्माता राज कपूर की वह पैतृक पोती है, अभिनेता हरी शिवदासानी की मातृक पोती है और एक्टर ऋषि कपूर की भतीजी है। कपूर के अनुसार उनका नाम “करीना” एक किताब एना कैरेनिना से लिया गया है, जिसे उनकी माता गर्भकाल के समय पढ़ती थी। अपने पिता की तरफ से देखा जाये तो वह एक पंजाबी है और अपनी माता की तरफ से देखा जाये तो वह सिंधी और ब्रिटिश है। वे बचपन में खुद को “शरारती बच्ची” बताती है, किशोरावस्था से ही उन्हें एक्टिंग का शौक था। विशेषतः करीना अभिनेत्री नरगिस और मीना कुमारी के कार्यो से प्रभावित थी। पारिवारिक पृष्ठभूमि फ़िल्मी सितारों से भरी होने के बावजूद उनके पिता महिलाओ को फिल्मो में काम नही करने देना चाहते थे क्योकी उनका मानना था की महिलाओ की जिम्मेदारियाँ परिवार और घर को सँभालने की होती है। इसी वजह से करीना और उनके माता-पिता के बीच हमेशा अनबन होती रहती थी और कुछ समय बाद वे अलग भी हो गए थे। बाद में उनकी माता ने ही उनका पालन पोषण किया, जिन्होंने अपनी बेटी के सपने को पूरा करने के लिए कई जॉब भी किये थे, तभी 1991 में करिश्मा ने फिल्मो में अपना डेब्यू किया। कई सालो तक अलग रहने के बाद अक्टूबर 2007 में उनका परिवार फिर एकसाथ रहने लगा था। कपूर कहती है की, “मेरे पिता मेरी ज़िन्दगी के मुख्य अंगो में से एक है, भले ही ज़िन्दगी के कुछ वर्षो में मैंने उन्हें न देखा हो, लेकिन हम हमेशा से ही एक परिवार की तरह रहे।”

कपूर ने मुम्बई की जमनाबाई नरसी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा और फिर देहरादून की वेल्हम गर्ल्स स्कूल से शिक्षा ग्रहण की। अपनी माता की इच्छा को पूरा करने के लिए ही वे स्कूल जाती थी। कपूर के अनुसार इंजे शिक्षा में काफी रूचि नही थी, बल्कि ऊंज कभी भी अच्छे ग्रेड्स भिन्धि मिले थे, उन्हें सिर्फ गणित में ही अच्छे मार्क मिलते थे। वेल्हम कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद मुम्बई के मिठीबाई कॉलेज से इन्होंने 2 साल तक कॉमर्स की पढाई की। बाद में यूनाइटेड स्टेट की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से उन्होंने तीन महीने का माइक्रोकंप्यूटर कोर्स भी किया था। बाद में लॉ में उनकी रूचि जागृत हुई और मुम्बई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में उन्होंने एडमिशन लिया। लॉ का एक साल पूरा करने के बाद ही कपूर एक्ट्रेस बनना चाहती थी। तभी मुम्बई के ही एक एक्टिंग इंस्टिट्यूट से उन्होंने ट्रेनिंग लेना शुरू किया।
अवार्ड –
कपूर को फ़िल्मफेयर के 10 नामनिर्देशनो में से 6 अवार्ड मिले है। रिफ्यूजी में उनके किरदार के लिए कपूर को सन 2000 में बेस्ट फीमेल डेब्यू का अवार्ड भी मिला था। 2003 में आयी उनकी फ़िल्म चमेली के लिए उन्हें विशेष सम्मान दिया गया था और इसके बाद देव (2004) और ओमकारा (2006) के लिए क्रिटिक्स (Critics) अवार्ड भी मिले थे। कपूर को बाद में 2007 में आयी फ़िल्म जब वी मेट के लिए बेस्ट एक्ट्रेस और 2010 में आयी फ़िल्म वी आर फॅमिली के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का पुरस्कार भी मिला है।

Sunday, 6 August 2017

फ्रेंडशिप डे 2017: भारत में ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ के समय से है दोस्ती की मिसाल

भारत में 'महाभारत' और 'रामायण' के समय से ही दोस्ती का बड़ा महत्व रहा है। राम-कृष्ण ने, हनुमान-सुग्रीव ने और कृष्ण-सुदामा ने भी सच्ची दोस्ती का समाज को अच्छा मैसेज दिया है।


भारत में फ्रेंडशिप डे का महत्व आज से नहीं है, अगर इतिहास के पन्ने पलटोगे तो दोस्ती की ऐसी ऐसी मिसाल मिलेंगी जो आज भी जीवंत नजर आती हैं। वैसे तो भारत में फ्रेंडशिप डे इंटरनेशनल के रूप में कुछ ही सालों से मनाया जाता है लेकिन भारत में ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ के समय से ही दोस्ती का बड़ा महत्व रहा है। राम-कृष्ण ने, हनुमान-सुग्रीव ने और कृष्ण-सुदामा ने भी अच्छे दोस्त बनकर समाज को अच्छा मैसेज दिया है। आज भी दोस्त का जिक्र होने पर इनकी दोस्ती की बात की जाती है। बीते साल फ्रेंडशिप डे 7 अगस्त को मनाया गया था और इस बार 6 अगस्त को फ्रेंडशिप डे मनाया जाएगा।
हनुमान – सुग्रीव
दोस्ती की बात हो बजरंगबली हनुमान का जिक्र ना हो तो सब अधूरा है। इनकी दोस्ती सुग्रीव से थी, जिन्होंने पूरी तरह हर परिस्थिति में हनुमान जी का साथ दिया था और सीता जी को रावण की कैद से छुड़ाने में भी मदद की थी।
कृष्ण – सुदामा
कृष्ण-सुदामा की दोस्ती के बिना सबकुछ अधूरा है। दोस्त वो है, जो बिना कहे अपने दोस्त की हर मुश्किल आसान कर दें। कुछ ऐसा ही भगवान कृष्ण ने किया था। उन्होंने अपने गरीब मित्र की मित्रता का भी मान रखा और उनकी गरीबी को भी हर लिया था।
नारायण धाम मंदिर उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील से करीब 9 किलोमीटर दूर स्थित एक ऐसी जगह है जिसे आज भी कृष्ण और सुदामा की मित्रता के रूप में देखा जाता हैं। ये भारत में एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान श्रीकृष्ण अपने मित्र सुदामा के साथ मूर्ति रूप में विराजित हैं। श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का प्रमाण नारायण धाम मंदिर में स्थित पेड़ों के रूप में आज भी देखा जा सकता है। मंदिर प्रबंध समिति व प्रशासन के सहयोग से अब इस मंदिर को मित्र स्थल के रूप में नई पहचान दी जा रही है। मान्यता है कि नारायण धाम वही स्थान है जहां श्रीकृष्ण व सुदामा बारिश से बचने के लिए रुके थे। इस मंदिर में दोनों ओर स्थित हरे-भरे पेड़ों के बारे में लोग कहते हैं कि ये पेड़ उन्हीं लकड़ियों के गट्ठर से फले-फूले हैं, जो श्रीकृष्ण व सुदामा ने एकत्रित की थी।
कृष्ण – अर्जुन
कृष्ण-अर्जुन के एक अच्छे मित्र और मार्गदर्शक रहे हैं। उन्होंने अर्जुन को उस वक्त संभाला जब वो परिस्थितियों के भंवर में फंसकर युद्ध छोड़कर जा रहे थे। तब कृष्ण ने अर्जुन को मार्ग दिखाया और अर्जुन ने भी मित्र की बातों का मान रखा। इतिहास और धर्मशास्त्र गवाह है कि भारत मित्रता के क्षेत्र में सबसे आगे रहा है। यहां की मित्रता जन्म-जनमांतर की होती है।

Monday, 31 July 2017

नौकरी छोड़कर AMAZON.COM कंपनी बनाने वाले JEFF BEZOS की प्रेरणादायक कहानी

अमेज़न के 'जेफ्फ बेजोस की कहानी'...

नमस्ते Friends,
आज आपको Amazon.com की कहानी बताने जा रहा हूँ...
Jeff Bezos ये उस व्यक्ति का नाम है जिसने अपनी हदों को तोड़कर इतिहास रच दिया। इन्होंने ही Amazon.com की Starting की थी। अपनी मेहनत से ही इन्होंने Amazon को इतना बड़ा बनाया कि, Amazon की कीमत आज $107 Billion है।


Early Life: 

Jeff Bezos का जन्म 12 January 1964 में New Mexico, US में हुआ। जिस समय इनका जन्म हुआ उस समय इनकी माता Jacklyn नाबालिग थीं। इनके पिता Ted Jorgensen इन्हें बचपन में ही छोड़कर चले गए। इनके दादा जी ने इनका पालन-पोषण किया। Jeff Bezos का Interest Electronics में था। जब भी कोई उनके Room में बिना जानकारी के घुस जाता तो इससे बचने के लिए उन्होंने एक Electronic Alarm बनाया। जब Bezos 4th Class में थे तब उनके School में Computer आया। उनके स्कूल में किसी भी Teacher को Computer चलाना नहीं आता था इसलिए Bezos और उनके साथियों ने Books पढ़कर ही Computer चलाना सीखा और कोई भी नहीं जानता था कि, वे आगे चल कर Computer Field में Retail क्रांति लाएँगे।

Amazon.com Start कैसे हुई?

Amazon.com की शुरुआत July 1994 में हुई, 1995 में सबसे पहले Amazon को Online Books और Magazines खरीदने के लिए Design किया गया था फिर धीरे-धीरे Profit होने पर अन्य वस्तुएँ भी बिकने लगीं। Amazon.com का नाम पहले Cadabra रखा गया बाद में फिर लगभग 3 महीने बाद इसका नाम बदलकर Amazon.com रख दिया। Amazon नाम को रखने का कारण था कि वह इसे सबसे बड़ी Book Sales Business Website बनाना चाहते थे क्योंकि Amazon दुनिया की सबसे बड़ी नदी है।

Jeff Bezos का प्रभाव:

उन हस्तियों में से एक हैं जिनके काम से दुनिया के लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने लोगों का खरीददारी करने का तरीका बदल दिया है। Amazon की Starting सिर्फ एक छोटे से Garage और 3 Computers से हुई और आज Amazon Company में 2,30,800 से अधिक Workers हैं। Amazon का Revenue आज 107 Billion Us Dollar है। ये Website English, German, Spanish, Italian, Japanese, Brazilian, Dutch और Chinese भाषाओँ में Available है. इसका Business आज United States, United Kingdom, Japan, China, India France देशो में है।

Jeff Bezos द्वारा कहे गए Quotes:

1. A brand for a company is like a reputation for a man. You earn reputation by trying as many as hard things well.
किसी भी company का ब्रांड इंसान की प्रतिष्ठा की तरह होता है और आप प्रतिष्ठा को मुश्किल चीजें अच्छी तरह कर के प्राप्त कर सकते हैं।
2. There are two kinds of companies, those that work to try to charge more and those that work to charge less. We will be the second.
कम्पनियों के दो प्रकार होते हैं, एक जो कि, किसी वस्तु की कीमत अधिक लगाते हैं और दुसरे वो जो उसी वस्तु की कीमत कम लगाते हैं और हम दुसरे वालों में से हैं।
3. If you do build a great experience and team work, customers tell each other about that. Word of mouth is very powerful.
यदि आप अच्छा अनुभव और team बनाने में सफल हो जाते हो तो, ग्राहक एक-दुसरे से बात करते हैं और उनके शब्द बहुत शक्तिशाली सिद्ध होते हैं।
4. We expect all our businesses to have a positive impact on our ups and downs. Profitability is very important to every business or we wouldn't be in this market.
हम आशा करते है कि, हमारे व्यवसायों का सब पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लाभ हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है इसके बिना हम बाज़ार में नहीं रह सकते।

Amazon.com के Logo की Story:

आप सबसे Amazon का Smiley Logo तो जरूर देखा होगा। Amazon के नीचे एक Smile जैसा Arrow है जो A से Start होकर Z तक जाता है जिसका मतलब है कि, Website पैर A to Z सभी सामान मिलता है और Smile करता हुआ भी लगता है जिससे इसे एक Attractive Look मिलता है।

दुनिया ऐसे लोगों से भरी पड़ी है जिन्होंने लीक से हटकर काम किया और दुनिया में अपना अलग नाम कर के दिखाया। Start-up का सिर्फ एक ही फंडा है कि, सबसे पहले कुछ नया सोचो और सबसे पहले उस Idea को Implement करो, क्योंकि सोच पर किसी का Control नहीं है। याद रखिए, आपकी Problem आपकी असली समस्या नहीं है, आपका उस समस्या के प्रति नजरिया ही आपकी सबसे बड़ी समस्या है। अगर आप समझते हैं कि, ये समस्या छोटी है तो वो समस्या आपके जीवन में कोई प्रभाव नहीं डाल पाएगी और अगर आप सोचते हैं कि, ये समस्या तो बहुत बड़ी है तो वो आपके जीवन को जरूर बर्बाद कर सकती है। याद रखिए...

Thursday, 27 July 2017

कैसे बना McDonald’s दुनिया की टॉप फ़ूड चैन , पढ़िए McDonald’s की जबरदस्त कामयाबी की कहानी

मैकडोनल्ड के नाम को आज किसी परिचय की जरुरत नहीं , McDonald’s का बर्गर दुनिया भर में सबसे ज़्यादा consume होने वाली एक डिश है।  दुनिया में 65 million लोग एक दिन में 100 million से भी अधिक इसे खाते हैं ,  आज हम आपको इस restaurant की success story बता  रहे हैं।

कैसे हुई मैकडोनल्ड  की शुरुआत :
McDonald’s इस की शुरूआत एक छोटे से family business की तरह हुई था।  Richard McDonald और Maurice McDonald ने  1940 में इसकी स्थापना एक छोटे से स्टाल के रूप में की थी , पर शुरू के आठ वर्षो तक इन्हे कोई खास कामयाबी नहीं मिली ,तब ये केवल एक छोटा सा restaurant था। पर बाद में जब इन्होने बर्गर बनाने की पूरी प्रक्रिया को मशीनीकृत कर दिया , मशीनी करण के बाद इनकी काम करने की प्रक्रिया में जबरदस्त सुधार हुआ जिसकी वजह से इनके ग्राहक को इंतज़ार नहीं करना पड़ता था । जब तक लोग दूसरे restaurant में order देते थे McDonald’s order serve भी कर देते थे। अपनी fast service वजह से McDonald’s बहुत जल्दी famous हो गया। इन्होंने 1961 इसकी स्थापना के बहुत समय बाद अपने tread mark के लिए apply किया जिसे आप आज Ronald McDonald के नाम से जानते हैं |
कैसे हुई जबरदस्त कामयाबी की शुरुआत
इसी दौरान Ray Kroc नाम के एक व्यापारी जो मिल्क शेक बनाने की मशीन बेचता था , McDonald आया और वो वहां पर ग्राहकों की लम्बी लाइन देखकर हैरान था , उसने व्यापारिक दौरों में बहुत से सारे रेस्टोरेंट्स घूमे थे पर उसने ऐसा नज़ारा शायद कही नहीं देखा था  , उसने देखा ग्राहकों की लम्बी कतार  और  लोग मुस्कुराते हुए अपनी खाने की वस्तुए लेकर आ रहे थे , रे क्रॉक ने उनमे से कुछ को रोक कर पूछा यहाँ क्या खास है तो उन लोगो का जवाब था
“आपको सबसे अच्छा हमबर्गर सिर्फ 15 सेंट में मिलेगा और आपको आर्डर की  डिलीवरी के लिए वेटर्स को बार बार बोलना भी नहीं पड़ेगा  “
रे क्रॉक के लिए बर्गर बनाने की प्रक्रिया का मशीनी  स्वरुप  हैरान कर देने वाला था। 1954  तक McDonald की 10 शाखाएं खुल चुकी थी , पर ये सिर्फ नाम    के ही McDonald थे।

रे क्रॉक McDonald की क्वालिटी और स्पीड से प्रभावित थे , अतः उन्होंने McDonald से जुड़ने का फैसला किया और ये उनके ही विज़न का कमाल है जो आज दुनिया भर में McDonald’s के 34000 restaurant हैं जिनमें से कुछ तो ऐसी जगहों पर हैं जहाँ कोई सोच भी नहीं सकता जैेस Egypt . इसके बाद McDonald’s ने पीछे  मुड़कर नहीं देखा।
क्या है McDonald’s की सफलता का राज : 
McDonald’s की सफलता का राज है उसकी बेहतरीन क्वालिटी , तेज़ डिलीवरी , कम लगत और वाजिब कीमत

McDonald’s ने सभी देशों की संस्कृति के हिसाब से अपनी प्रक्रिया में भी बदलाव किये है और इसी अनुसार अपनी special recipe में भी ज़रूरी परिवर्तन किए ,जैसे भारत में धार्मिक नियमों के चलते beef और poke इस्तेमाल नहीं कर के लोगों के पेट के साथ साथ सबके दिलों में जगह बना ली।